अरुणाचल प्रदेश में घूमने लायक 5 सबसे अच्छी जगहें | Top 5 Tourist places in Arunachal Pradesh

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अरुणाचल प्रदेश भारत के पूर्वोत्तर में स्थित एक खूबसूरत पर्वतीय राज्य है। यहां पर प्रकृति के अद्भुत नजारे, बौद्ध मठ, दर्रे, झीलें और ऊंची चटानों के साथ-साथ अनेक प्राचीन म स्मारक भी हैं। इस राज्य में घूमने के लिए कुछ लोकप्रिय स्थान हैं जैसे ताली पटार, जीरो वैली, रोइंग, तवांग और पासीघाट। अरुणाचल प्रदेश का एक विचित्र और प्राचीन पर्यटन स्थल है जो शांगरी-ला नाम से जाना जाता है। यहां पर आने वालों को सबसे अधिक रूमानी और रहस्यमय नजारे देखने को मिलते हैं। अरुणाचल प्रदेश में घूमने के लिए सबसे अच्छी जगहों की सूची अलग-अलग स्रोतों से भिन्न हो सकती है, लेकिन इन स्रोतों के अनुसार यहां पर जिरो घाटी, ईटानगर, भालुकपोंग, दिरांग और नामपोंग भी लोकप्रिय स्थान हैं।
Bomdila

01. बोमडिला: अरुणाचल प्रदेश का आध्यात्मिक गहन और प्राकृतिक सौंदर्य

बोमडिला अरुणाचल प्रदेश का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता, बौद्ध धर्म और विभिन्न शैलियों के लिए जाना जाता है। बोमडिला जाने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से अप्रैल के बीच होता है, जब मौसम ठंडा और सुहावना रहता है। यहां आने वाले पर्यटक पर्वतीय दृश्य, बौद्ध मठ, और आकर्षक पर्वतीय वातावरण का आनंद ले सकते हैं। बोमडिला विशेष रूप से ट्रेकिंग, पिकनिक, और फोटोग्राफी के शौकीनों के बीच लोकप्रिय है। यहां आप पर्वतीय वन्य जीवों, पक्षियों, और फूलों का संग्रह देख सकते हैं। बोमडिला एक शांतिपूर्ण और प्राकृतिक स्थल है जहां आप अपने परिवार और दोस्तों के साथ समय बिता सकते हैं

Gorichen Peak

02. गोरीचेन पीक: हिमालय की रानी का परिचय

गोरीचेन पीक अरुणाचल प्रदेश की सबसे ऊंची चोटी है। यह चोटी समुद्र तल से 7,138 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। गोरीचेन पीक को “स्वर्ग का द्वार” भी कहा जाता है। चोटी पर चढ़ाई एक चुनौतीपूर्ण अनुभव है, लेकिन यह एक अविस्मरणीय अनुभव भी है।

गोरीचेन पीक अरुणाचल प्रदेश की यात्रा के लिए एक साहसिक अनुभव है। अगर आप रोमांच पसंद करते हैं, तो आपको गोरीचेन पीक पर चढ़ाई जरूर करनी चाहिए। चोटी से आप अरुणाचल प्रदेश के खूबसूरत दृश्यों का आनंद ले सकते हैं।

Ziro Valley

03. जीरो वैली: अरुणाचल प्रदेश का हरा-भरा स्वर्ग

जीरो वैली अरुणाचल प्रदेश की सबसे खूबसूरत घाटियों में से एक है। यह घाटी समुद्र तल से 3,800 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। जीरो वैली अपने हरे-भरे पहाड़ों, झरनों और झीलों के लिए प्रसिद्ध है। घाटी में कई खूबसूरत ट्रेकिंग रूट भी हैं, जो प्रकृति प्रेमियों के लिए एकदम सही हैं।

जीरो वैली अरुणाचल प्रदेश की यात्रा के लिए एक शानदार जगह है। यहां आप प्रकृति की सुंदरता का आनंद ले सकते हैं और लंबी पैदल यात्रा का अनुभव कर सकते हैं। घाटी में कई आदिवासी समुदाय भी रहते हैं, जिनके साथ आप करीब से संपर्क कर सकते हैं।

Tawang Monastery

04. तवांग मठ: अरुणाचल प्रदेश की आध्यात्मिक ऊंचाई

तवांग मठ अरुणाचल प्रदेश का सबसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। यह मठ 16वीं शताब्दी में तिब्बती बौद्ध धर्म के संस्थापक पद्मसंभव द्वारा बनाया गया था। तवांग मठ अपने विशाल आकार और अलंकृत वास्तुकला के लिए जाना जाता है। मठ में एक विशाल पुस्तकालय भी है, जिसमें दुर्लभ बौद्ध ग्रंथों का संग्रह है।

तवांग मठ अरुणाचल प्रदेश की यात्रा के लिए एक अनिवार्य स्थान है। यह मठ यहां की समृद्ध बौद्ध संस्कृति का एक प्रतीक है। मठ के परिसर में कई मंदिर, मूर्तियां और अन्य धार्मिक स्थल हैं। मठ के आसपास के क्षेत्र में भी कई खूबसूरत प्राकृतिक दृश्य हैं।

Papum Pare

05. पापुम पारे लेक: रहस्यमय सुंदरता का घर

अरुणाचल प्रदेश के छिपे हुए रत्नों में से एक, पापुम पारे झील (Papum Pare Lake) अपनी रहस्यमय सुंदरता से हर किसी को मंत्रमुग्ध कर देती है। समुद्र तल से लगभग 1,400 मीटर की ऊंचाई पर स्थित, यह सुंदर झील पूर्वी कमेंग जिले में लोहित नदी की सहायक नदी पर टिकी हुई है। इसका नाम स्थानीय जनजातियों की भाषा में “छिपा हुआ जल” से जुड़ा हुआ है, जो इसके शांत और एकांतपूर्ण वातावरण को सटीक रूप से दर्शाता है।

आकर्षक दृश्य: झील का स्वच्छ पन्ना-हरा पानी आसपास के हरे-भरे पहाड़ों को प्रतिबिंबित करता है, जो एक लुभावनी पैनोरमा बनाता है। सुदूर से आने वाले बादलों का झीले के ऊपर नृत्य करना एक ऐसा दृश्य है जिसे शब्दों में बयान करना मुश्किल है। वनस्पति का घना आवरण झील के आसपास एक शांत वातावरण बनाता है, जो प्रकृति प्रेमियों के लिए एकदम सही आश्रय स्थल है।

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स्वर्ण मंदिर अमृतसर शहर के केंद्र में स्थित है। यह मंदिर एक कृत्रिम झील के बीच में स्थित है, जिसे सरोवर कहा जाता है। स्वर्ण मंदिर के चारों ओर एक चारदीवारी है, जिसमें चार द्वार हैं। मंदिर के अंदर एक विशाल हॉल है, जिसे अमृतसर कहा जाता है। अमृतसर में गुरुग्रंथ साहिब, सिखों का पवित्र ग्रंथ रखा गया है.
स्वर्ण मंदिर को स्वर्ण मंदिर इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसका गुंबद और दीवारें सोने से मढ़ी हुई हैं। स्वर्ण मंदिर को सोने से मढ़ने की परंपरा 17वीं शताब्दी में शुरू हुई थी और तब से मंदिर को कई बार सोने से मढ़ा गया है। स्वर्ण मंदिर का सोना एक पवित्र धातु है और यह भगवान की कृपा का प्रतीक है. स्वर्ण मंदिर को सोने से मढ़ने से सिखों को यह विश्वास होता है कि भगवान उनका आशीर्वाद दे रहे हैं।

स्वर्ण मंदिर में सोने की मात्रा का कोई आधिकारिक अनुमान नहीं है, लेकिन यह अनुमान लगाया जाता है कि मंदिर में लगभग 100 किलोग्राम सोना है. यह सोना मंदिर के गुंबद, दीवारों और अन्य सजावटों में इस्तेमाल किया गया है

स्वर्ण मंदिर का निर्माण 1588 में शुरू हुआ और यह 1604 में पूरा हुआ. मंदिर का निर्माण गुरु अर्जुन देव ने करवाया था, जो सिखों के पांचवें गुरु थे. उन्होंने कहा था कि सभी धर्मों के लोग इस मंदिर में आकर प्रार्थना कर सकते हैं

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